रविवार, 14 दिसंबर 2014

कॉर्पोरेट का राजनीति में बड़ता दखल

कॉर्पोरेट का राजनीति में बड़ता दखल और पार्टियो पर लगते आरोपों से सिद्ध हो गया  की चुनावी मैदान में केवल राजनैतिक दल ही नही कॉर्पोरेट भी है। करोड़ो से अरवों में पहुचता चुनावी खर्च दर्शाता है।  कि कॉर्पोरेट जगत ही पार्टियो को फड़ के नाम पर चुनावी खर्च का वाहन करता हैं और चुनाव के बाद उन पर मेहरवान होकर प्राकृतिक संशाधनों का अंधाधुन्द दोहन कराकर मुनाफा पहुचाते हैं। स्पेक्ट्रम, कोयला और गैस जैसे अरवो खरबों के घोटाले हुए। कोंग्रेस बजेपी पर आरोप लगती है की पैतलिश हज़ार एकड़ की जमीन नैनो कर सयंत्र लगाने के लिए अदाणी को एक रूपए गज मे गरीबो दी, तो जबाब मे बीजेपी सुब्रमण्यम नेता स्वामी  कोंग्रेस पर सोनिया के दामाद रॉवर्ट वाड्रा पर जमीन को करोडो मे बेचने का आरोप लगाया।इन सब मे  एक तथ्य सत्य है की दोनों ही पार्टिया कॉर्पोरेट की कठपुतलियाँ है।  जब आम आदमी पार्टी ने तेलमंत्री वीरप्पा मोहली और रिलायंस ग्रुप के मालिक मुकेश अम्बानी पर गैस की धांधली का आरोप लगाए और एफआईआर की जो जिस तरह से  राजनीतिक दल बचाव मे आ गये जिस कोयला घोटाले पर इतने सालो से भाजपा और कोंग्रेस चुप्पी सादे बैठे हुए थे जब केजरीवाल ने आवाज़ उठाई तो पुरे देश मे हंगमा मच गया इसी प्रकार जब सीबीआई ने मंगलम् बिड़ला को दोषी मान खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जाँच की बात की तो केंद्र सरकार ,बीजेपी  और उघोग जगत बिड़ला के बचाव मे आ गया। जिस तरह से कॉर्पोरेट और राजनीति का चोली दामन का साथ हैं वो देश की आर्थिक सेहत और विकाश के लिए हानिकारक है। 

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