शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

सेक्युलर कि परिभाषा

हमारे देश के वैचारिक और बुद्धजीवी  वर्ग खासकर वो वर्ग जो अपने स्वयं को मानवतावादी और सेक्युलर कहलाना पसंद करते हैं। तथाकथित ये सेक्युलरवादी केवल मुस्लिम हितों को ही सेक्युलरिज्म मानते हैं। फिर चाहें वो भारत के हो या अन्य किसी देश कें।  इनकी एक और प्रवृति है की मुसलमानों के साथ बुरा किसी भी मुल्क में हो इनका विरोध येन केन प्रकरेण संघ और बीजेपी को दोष दिए बिना पूरा नही होता। इनके मानवतावाद में केबल मुस्लिम हित ही शामिल है। आपत्ति मुसलमानों की लिए आवाज उठाने  से नही बल्कि केवल मुस्लिम को ही क्यों मानवता और सेक्युलर के दायरे आते हैं। विश्व में अन्य धर्मों की हालत भी निराशाजनक हैं। पादरी और यहुदी समुदाय की जनसंख्या लगातार घटती जा रही हैं। पादरी समुदाय की जनसंख्या 60 हजार है जो बीते सालों से लगातार कम होती जा रही है. यहूदीयों की जनसँख्या केवल 5 हजार हैं। पाकिस्तान और बंगलादेश में आज हिन्दुओं की क्या दुर्दशा है उसकी और भी ध्यान दिया जाना चाहिए या नही। पाकिस्तान में हुई 1951 की जनगणना में हिन्दु और सिखों की जनसंख्या का प्रतिशत कुल जनसख्या का 4 प्रतिशत था। लेकिन 1991 में हुए जनगणना में इनका प्रतिशत 1 कैसे रह गया। बाकि 3 प्रतिशत लोग कहा चले गये। हिन्दु मंदिरों को तोड़ा जा रहा हैं। उन्हें अपने धार्मिक रीती रिवाजों को करने से रोका जाता हैं। क्या हमारे सेक्युलर भाई इनके लिए भी चिंता  जाहिर करेंगे।
           गाजा में हो रहे इजराइल हमले की निंदा हर कोई कर रहा हैं। पर एक प्रसिद्ध हिंदी अखबार के लिखा जाता है कि इस हमले में ज्यादा खुसी संघ और बीजेपी को हो रही हैं। लेखक के अनुसार "दुनिया में जहां कही भी मुसलमानों को नुकसान पहुंचे ,आरएसएस भले ही मिठाइयां न बाटे, पर इनके नेताओं के चहरे खिल जाते हैं।"और आगे लिखते है कि "इसी वजह से केंद्र सरकार ने गाजा पर कोई प्रस्ताव लाने से इंकार कर दिया। ऐसा कभी नही हुआ कि भाजपा या उसके किसी संगठन ने इजराइल दूतावास पर हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया हो।" इस तर्क से ये सिद्ध होता है कि सेक्युलर की नीति चीखने और चिल्लाने की रही हैं। वो ये भूल जाते है कि इजराइल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ में द्वारा मानवाधिकार उलंघन प्रस्ताव के पक्ष में भारत ने वोट भाजपा की सरकार ने ही दिया था। जो दर्शाता है कि वो इन हमलों की भर्त्सना करते हैं। लेकिन जिन्हें केवल किसी भी प्रकार से जो गंगा, गाय, गीता और हिंदु की रक्षा की बात करें या उनसे जुड़े मुद्दों को उठायें वह इनकी नजर में न केवल मुस्लिमविरोधी बल्कि साम्प्रदायिक हैं। इनका वश चले तो यह जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ के पीछे भी भाजपा और संघ का नाम लेने लगें। पर अफ़सोस की ये कहना उनके वश में नही।

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